चैतु दिल्ली एग्जीविशन मा हैळ निमा , निशुड्डु, च्योला, नाडु जुआ, दंदळु लेकन हर बार आन्द ।
जबकि सचै इन च कि चैतु थैं हैळ का बारमा कुछ बि पता नीच। न वैन कबि हैळ लगाई ।
वैधैं पुछे ग्याई हथन्वडु क्यों खुणै ब्वलेजान्द ?
त चैतु ब्वनू जब बल हथन नाडु पखड् ? यूँ रैन्द वा खुणै हथन्वडु ब्वले जान्द । वैका चेला ब्वना वा वा गुरु जी भौत सुन्दर’ फेर बि वैधैं पुंगडि बचाओ अभियान कु अध्यक्ष बणये ग्याई अब वो लोगु थैं प्रोत्साहन कना खुणै बनि बनि का स्वांग रचद ।
अपणा द्वी चार चेला चांठ्यू थें गौंमा हैळ लगाणै प्रतियोगिता करान्द । वैथै देखी गौं का असली हळ्या जु पूरी जिंदगी पुंगड्?यू मा रैकि अर बळ्दू का पिछनै रा रा रा कैरि म्वरणा रैन चुप खोळ्यां रैगी ।
असल बात इन छै कि चैतु फोन मा कैमरा ओन कैरि कन सिरप अपणां लोगु की फोटु खैचणू अर फेसबुक मा डलणूं अर कैप्सन ल्यखणू सफल आयोजन ।
गौं का लोग इलै खुश छाई कि चलो ये बाना पुंगडा त बये जाला। हमरु हस्त उद्योग हमरि बिरासत त बचीं रैली ।
अब देशी हळ्या बारी बारी है ळ लगाणा अपणी अपणी प्रतिभा बताणा रैन । क्वी त चटेलि सर्या पुंगडि डामर धनू सई त क्वी बांजा पुंगड्यू मा बिना हैळ लगयाँ दंदळु लगाणा रैन त कैन सीधा जोळ लगै द्याई द्य कैन त बिना बीज ध्वल्यां बोलि द्याई कि भविष्या मा फसल बढ़िया होण ।
चैतु भेजी अर ऊँका दगडि रैण वळा कुछ बुद्धिजीवी समझणां रैन कि यु काम गलत होणू । ऊथै पता च कि यूँ पुंगड् ? यून बांजै रैण पर मजबूरी इन छै कि चैतु भैजी सब्यूं खुणै ब्वना रैन तालि बजाओ अर भौत सुन्दर भौत सुन्दर ब्वालो ।
हौरि बि ऊँका दगडि हाँ परि हाँ मिलाणा रैन इन सोचि कि क्य पता भवाळ हम थें बि ऐग्जीविशन मा जगा मीलि जा ।
असली हळ्या मुण्ड पखड़ी रुणां रैन अर ब्वना पैली बाँजु छाई प्वड्यूं अब त . चैतुन वाँ फरि मोहर लगै यालि ।
अब इन ह्वाई कि छः मैना बाद द्याखा त पुंगडा वनि बांजा छाई । इना चैतु भैजी
अखबारू की कटिंग चुलाणा रैन फेसबुक मा ज्यांमा ल्यख्यूं छाई भौत सुन्दर प्रयास। पर जमीन, मा सबै इन छाई कि काम त कुछ काई नीच ।
तब गाँ का बुड्या ब्वलण लग गीं कि जब तुमरु अपरू अग्वान उ बणयूं जैथै अफु पता नीच कि हैळ क्या होंद त और हळ्या त वनि बि छिरक्वा बल्द हिटळणा छन इनि त होण तब ।
पुराणा अर असली हळ्या इन बीज बीज बुतदा छाई कि फसल बि होंद छाई अर अग्नै खुणै बीज वि धरेन्दु छाई पर इत कळत कना छन ।
ई अचकल्यूं हैळ लगै कि पुंगडि चलतु कनै की सूचै ।
ठीक इनि हमरि संस्कृति सभ्यता बोली भाषा अर साहित्य मा बि होणू सब्बि आज द्यखणा छन अग्नै खुणै बीज बुतण क्वी चाणूं न कैन इन उयार काई कि यु बीज अगनै पीढ़ी खुणै बच्यू रा। कुल मिलै कन आइक्रीम’च सब्बि जगा उबरि खै त खै नथर गैळि कन खत्म ।
