रंत रैबार ब्यूरो
देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूडी स्वर्ग सिधारी गेन। वू 91 साला छा। वू बहुत लंबा टैम बटि बिमार चलणा छा। सबि राजनेताओं अर सामाजिक संगठनों न बूंका निधन परे दुख जतै। श्री खडूडी जी का निधन पर उत्तराखंड मा तीन दिनों राजकीय शोक घोषित करेगि।
पहली बार लोकसभा पहुंचणा क द्वी साल भितर ही श्री खंडूडी जी तैं पार्टी कु मुख्य सचेतक बणै गर्दै छौ। 1996 का लोकसभा चुनाव मा खडूड़ी जी तैं हार कु सामाना कन्न पोड़ी छो। 1999 मा अटल बिहारी सरकार मा वूतें सड़क परिवहन मंत्री बणैगै। ये दौरान देश मा सड़कों की शक्ल बदलण अर हाईवे
बनों काम ह्वे, ज्यां का वास्ता खडूडी की आज तक प्रशंसा हुंदी।
2007 बटि 209 तके खंडूड़ी जी न मुख्यमंत्री कु पद संभाली। 2011 मा वूतैं फिर से मुख्यमंत्री बणैगि।
अपणा मुख्यमंत्री काल मा लोकायुक्त विधेयक तैं लेकी बी.सी. खंडूडी न ऐतिहासिक कदम उठै। साल 2011 मा खंडूड़ी जीन उत्तराखण्ड मा सवसे सख्त लोकायुक्त कानून पास करवे। उत्तराखंड मा पास ये लोकायुक्त मा मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, आई.ए.एस, आई.पी.एस का दगड़ि सभ्भि अधिकारी लोकायुक्ते जांचे दायरा मा छा। यांमा भ्रष्टाचार पर सख्त कार्यवाई कु नियम छो।
बीसी खंडूड़ी न फाइल प्रोसेसिंग मा
तेजी, जन शिकायत निवारण तंत्र तैं मजबूत कन्न पर जोर दे। वून सरकारी कर्मचारियों का ट्रांसफर मा पादर्शिता लाणे कोशिश करि। यांका वास्ता वून कति सुधार करिन। बी.सी. खडूड़ी तैं गवर्नेस अर पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी को वास्ता जणे जांदू। खडूड़ी जी सैनिक अधिकारी छा, इले वू भ्रष्टाचार परे जीरो टॉलरेंसे नीति कु पालन करदा छा। यांका वास्ता वू सख्त राजनेता का तौर परे जाणे जांदा छा। वून भ्रष्टाचार मुक्त शासन कु नारा दे। ज्यां ने राज्य का दगड़ि देश मा भी ऊकीं अलग छवि बणि। खंडूडी जी एक ईमानदारी छवि का नेता छा। वून सरकारी खर्च मा कटौती करि। दगड़ि वून सरकार मा अनुशासन तैं प्राथमिकता दे। वून सी एम
बणदीं ही नेताओं, मंत्रियों अर अधिकारियों बटि टैमों पालन करणे अपील करि। श्री खंडूड़ी जी का निधन परे राष्ट्रपति द्रोपदी
मुर्म, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी न शोक जते।
