रंत रैबार ब्यौरो…..
म्यार ददा का कूडौँ का करा फरि जळवटा बणयां छाई । उख म्वारा पेतंण बणांदा छाई अर सैद तैयार करदा छाई। च्यार ददा वै सैद वे निकल छाई। गौंका लोग छुट्टा बच्चों मैं खांसी जुखाम मा दींणु खुणै मांगि लिजांदा छाई ।
म्यार ददा फरि बि साठ पैंसठ वर्ष मा बि प्याऊ पेंटिंग रंदी है। किलैकि कि म्यार ददा सैद अर माछौं कु भौत सौकिन छै।
एक दिन म्यार ददा रात भर उठ्यू अर हथ मा टिमरु कु लड्डा पखड्यूं। मिन ब्वाल ददा जी क्य बात आज सीणा नि छौ ?
बल ब्यटा कैदिन गुदड़ी कैदिन कखड़ी कैदिन मुंगरी त चौरुन चोरि छन मिन कुछ नि ब्वालू पर अबरि दाँ त हद है गे।
मिन ब्वाल क्या है ? बल क्वी जळवटों बटि सैत निकाळी लीगे। वो जो बिच मिन वो पखड़णु च अर टिमरु का स्वट्टीँन चुटण।
मिन ब्वाल ददा ऊन पखड़ेणु कन मी च ? बल हरै क्य बात कनू छै प्रभात देख तू । प्रभात म्यार दादन गौं मा पंचेत धरै अर ब्वाल कि साब अफार स्ये मदनू कु आँखु उस्ययूं स्येन ही गाड़ सैद । तबर्यू चट्ट रम्मा दादा ब्वनू न भै ना वो ता राति भैर बैठ्यूं छाई अर कीड्डु ऐ उड़ि कन अर वैन नडकै ।
म्यार ददा थें शक है अर दादन पूछी वै कनमा पता ? क्य तु दगड़ी छाई ? बब रम्मा दादा की बोलती बंद हाँ बोलू कना। हाँ बुल्दु त चोर गिणेंदु न ब्वल्दु त न ब्वन तिन पैली किलै ब्वाल ?
तनि खट्ट गिरि दा ऐ गे बल प्रधान जी अर रम्मा त दगड़ि छाया बैठ्यां । यु नु ऐ येकु आंखु छाई सुज्यूं । प्रधान न पूछि वैका द्वी हथ आंखौ फरि लगयां बोला त वैन अंध्यारा मा कनमा देखि घौरौ बाटू ?
तनि नरु भैजी ऐनि अर ब्वना न साब
ना येका एक हथ मा टौर्च छै। अर इ द्वी बि वैका दगडि छाया यूंमा एक बल्टी है। मिन अपणां छज्जा मा वटि द्याखा ।
सबरांण बैठि गीं लोग ब्वना इ बकि बातका तनि दिख्या त के तिन्यू फरि किरम्बळी अयां छन क्या ? हमथै त नि तड़काणा छन सैत खत्यूं यूंका लारा लत्ती मा इलै किरम्बळा किरम्बळा तब म्यार दादन ब्याल साब ई लगणा छन । प्रधान जीन ऊं फरि जुर्माना लगै अर म्यार ददा चैं पूछि अब बैंगे फैसला ? म्यार दादन बोली साब यु त सैत छीई मिन हल्ला मचैत ई पखड्ये गीं पर जी गुदड़ी कखड़ी कुटळू दथुडु गाँमा बटि च्वरिन वो चोर कख छीं ? प्रधान जी ब्वना मतलब ई पूरा चालीस चोर छन अज्यूं सैंतीस हौरि छन । अब गाँका लोग ब्वना प्रधान जी तुम हमरा आली बाबा छौ वों सैंतीस चौरु कु बि इलाज कारो। अब प्रधान जी रोज ऊंका पिछनै अपणां जासूस भ्यजणा छन पर वो चोर बि चंट छन द्वी तीन त अपणां सुसरास भाजि गीं । पर कब तक लुकला । जब आली बाबा इख च त चालीस चौर बि जरूर आला।
