रंत रैबार ब्यौरो…..
बाग लैगाया पोरु कई साल, ल्वे पौंद जांद बेटी ब्याडु गाल । पैलि-पैलि बाग चोरखिंडा गाय, तख वेल देवी को खाडू जाय। तब गाय बाग, बंगार बच्णै, कप्तान साब से हेगे लौ । कप्तान साबा ल मार लथा, बागा ल अंगोठ्या खाय कैर सपा । तब गाय बाग जी मासी बणै, पंछी को बल्द मार डोल हौ । पंछी ल बंगार भेज बौड़ी, बागा ल मारी बाल लैंदी गौड़ी स बाग मनू कू ऐगे सारी जत्था, इस्कूल्या नौनि मार एक्या गफा । बाड़ी लगूली लगुली लेटा, बाग बैठिग्या उड्यारा पेटा । बाग मना कि अब बात सूणा मर्च मिटै नि ऊँल दस दूणा । कूटो तमाखू, तमाखू धुसी, बाग मोरिग्या अब जनता खुशी ।
आभार – भगतराम सेमवाल
