रंत रैबार ब्यूरो….
देहरादून। साहित्य समाजौ ऐना होंद, संस्कृक्ति नैनीताल सि नैना-सुनैना होंद अर भाषा भीमतालै सि तोता मैना होंद। साहित्य सिरप शब्दूं कि शबद कीर्तन नि, सिरिस्टि नि, बल्किन लोक समाजै समळौण्यां बाडूळि, संवेदनूं पराज अर संस्कारों कि भिंटोळि तैइ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सै-संजोह रखणवळि वऽ ज्यूदि धरोहर छ, जो मनखि मैं चूंका मूळ जळड़ों से जोड़ि जाड़िक रखद। ये हि मूळ भावना तह साकार करदि ‘हजार ग्राम हजार धाम, हमरी भाषा हमरी पछ्याण’ कि परिकल्पना मासिक साहित्यिक संगोष्ठी, दिल्ली का आयोजन डी.पी.एम.आई., न्यू अशोक नगर का सभागार मा श्रीलगुठि का सांस्कृतिक सानिध्य मा सुसंपन्न हेइ। मासिक संगोष्ठी तइ संस्थान का संस्थापक डॉ विनोद बछेती कु संस्थागत अर ब्रह्मर्षि जगदाचार्य डॉ. गौरीशंकराचार्य जी महाराज, पीठाधीश पशुपति पीठ दिल्ली कु आध्यत्मिक सान्निध्य बि दैणु हेइ
कार्यक्रम कु श्रीगणेश श्रीलगुली पूजन अर डॉ हेमा उनियाल अर सुनीता जुयाल का मांगल गीत से ह्वेइ । संगोष्ठी का पौणोंन धूप धू प्रज्वलित करि अर कार्यक्रम कु विधिवत शुभारंभ हेइ ।
सबचुळे पैळि कार्यक्रम मा वयोवृद्ध साहित्यकार वल्लभ डोभाल का निधन पर
‘शैलांचली’ ला वृंकी रचनों ‘ सैनिक संवाद’, ‘तिब्बत की बेटी’, ‘बुल्डोजर’ और ‘कही अनकही’ का मार्मिक अंश पैड़िक वृंका रचना संगसार तँइ एक नयो आगास दे।
यांका बाद सुदूर नेपाल का धनगढ़ी बिटि अयां डॉ. देबेन्द्र प्रसाद भट्ट तैइ साहित्य का छेतर मा वृंका शोधपरक उत्कृष्ट जोगदान खुणि अर पिथौरागढ़, कुमाऊं विटि अयां डॉ. पीताम्बर अवस्थी तेंइ समाज-शिक्षा एवं निःस्वारथ सामाजिक सेवाओं खुणि अंगवस्त्र, प्रशस्तिपत्र एवं पुष्पादि से श्रीमान्य किये गे।
प्रशस्ति कि परिकल्पना जगमोहन सिंह रावत ‘जगमोरा’ की छ। संयोजन हिंदी मा सुशील बुड़कोटी ‘शैलांचली’? ला,
अवस्थी ला, गढ़वाली मा गोविंद राम पोखरियाल ‘साथी’ ला अर कुमाउनी मा हेमा जोशीन करि।
नेपाली मूळ का ज्ञानेंद्र पुरी, वायुसेना अधिकारी (से.नि.), दिल्ली; गजेंद्र सिंह ‘बटोही’, साहित्यकार संपादक/प्रकाशक, नैनीताल; विद्या दत्त शर्मा पर्यावरणविद्/कृषि कवि, मोती बाग रैबासा, सांगुड़ा, पौड़ी गढ़वाल; चंदन मनराल, समाज सेवी, हल्द्वानी; राज कुमार बड़थ्वाल, आई आर एस (से.नि.), अध्यक्ष उत्तरायणी एवं अध्यक्ष बड़थ्वाल कुटुम्ब; ब्रह्मर्षि डॉ. गौरीशंकराचार्य जी महाराज छन।? प्रशस्तियों की रूप सज्जा रावत डिजिटल और विद्या प्रकाशन ला करि। प्रशस्तियों
पोखरियाल का श्रीमुख से हेइ।
डॉ. देवेंद्र प्रसाद भट्ट प्राध्यापन अर भागवत वाचन एवं धर्म प्रचार का दगड़ पुस्तकों का लेखन अर संपादन से जुड़ीक कै पुरस्कारों से श्रीमान्य हे चुकीन। डॉ भट्टन ‘शरीर विज्ञान’ नामै नेपाली भाषा की कविता से सब्यूं कि जिकुड़ि मा छपछपि लगे दे, बुकड़ि मा भूख तीस जगे दे, अर मुखड़ि मा राँतेळु धनगढ़ी सजे दे। वूल बोलि संगोष्ठी का यीऽ परयास नेपाल भारत का रोटी-बेटी का मैतरी संबंधू तैइ हौरि मजबूती प्रदान कारला।
संस्कृत, हिंदी, नेपाली, कुमाउनी अंग्रेजी भाषाओं का ज्ञाता डॉ पीताम्बर अवस्थी का उत्कृष्ट साहित्य, नशामुक्ति, बेटी बचाओ-
बेटी पढ़ाओ, नौळा धारा अर पर्यावरण संरक्षण का क्षेत्र का ठुला कार्यों लैंड विशेष रूप से रेखांकित किये गे। कै पुरस्कारों से श्रीमान्य डॉ पीतांबर अवस्थीन पिथौरागढ़ मा अपणा हि व्यक्तिगत संसाधनों से एक महत्वपूर्ण पुस्तकालय कु निर्माण कर्फ्यू छ। विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर द्वी दर्जन से जादा पुस्तकें वेंकी प्रकाशित डे चुकीन। डॉ हेमा उनियालन बोलि कि पिथौरागढ़ मा तै पुस्तकालय तँइ दिखणो सौभाग्य वृं तुझ् बि मिलि।
ब्रह्मर्षि जगदाचार्य डॉ. गौरीशंकराचार्य जी महाराज जीन एक दोहा- ‘बहु बीती छोटी रही, पलपल गई बिताए/एक प्रहर के कारण, क्यों कलंक लग जाए?’ का व्याख्यान का दगड़ बताणै कोसिस करिकि कैं तरां एक गिताड़ नचाड़ नट- नृतकी का ये एक हि साहित्यिक दोहा तँइ सूणिक राजगुरु, राज कुमारी, राजकुंवर, खुद भोग विलासी राजा अर आखिर मा खुद नृतकी का जीबन मा सांस्कृतिक अर सामाजिक परिवर्तन ऐइ। वून बोलि कि साहित्य प्रकृति कु सौ-सिंगार छ। साहित्यकार हिमालै को तरां प्रकृति कु संरक्षक अर संवाहक छ। ब्रह्मर्षि जगदाचार्य डॉ. गौरीशंकराचार्य जी महाराज लगभग चार दशकों से दिल्ली मा आध्यात्मिक क्षेत्र मा सक्रिय छन। वृंकी कृति ‘गुरु गीता’ प्रकाशित छ अर भागवत-विवेचन से संबंधित ग्रंथ प्रकाशन का बाटा अग्रसर छ।
डॉ. कुसुम भट्ट ‘शोभनी’ अर बूंकी ‘आदिनाद ग्रुप’ की टीमन द्रोपदी की पंडौ वार्ता शैली मा पारंपरिक वाद्ययंत्रों, कोरस अर एकल प्रस्तुति का माध्यम से मनमोन्या समलौण्या लोक-सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करि। डॉ कुसुम भट्ट ‘सोभनी’ ला बोलि कि संगोष्ठी मा आदिनाद ग्रुप द्वारा यऽ चूंकी पैळि नै-नवाड़ परस्तुति छ। बतै द्यांकि कि डॉ कुसुम भट्ट कु ‘सोभनी’ उपनी भी मासिक संगोष्ठी की देन छ। डॉ कुसुम भट्ट यांसे पैळि राजभवन देहरादून मा उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन, माननीय राज्यपाल, उत्तराखंड गुरमीत सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) अर अन्य महानुभावों का समणि पंडौ वार्ता परस्तुति दे चुकीन। मासिक संगोष्ठी मा पुस्तक विमोचन, पुस्तक पर साहित्यिक चर्चा समीक्षा, बहुभाषी कवि सम्मेलन अर हर भाषा, विधा, कला संस्कृति साहित्य प्रेमियों की परिचै की ओपनिंग सेरेमनी होणि छ।
उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का संरक्षक डॉ विनोद बछेतीन बोलि कि मासिक साहित्यिक संगोष्ठी द्वारा हर मैना भाषा, संस्कृति साहित्य का क्षेत्र मा लगालगि उल्लेखनीय देव कारिज होणा छन। भाषा संस्कृति साहित्य समाज का छेतर मा ठुला देव कारिज कन्न वला देवतुल्य ठुला लोगों तैइ हिंदी, नेपाली, गढ़वाली, कुमाउनी अर जौनसारी भाषा मा प्रशस्ति सम्मान दिये जाणो, भाषा, संस्कृति, कला, साहित्य का संरक्षण मा संगोष्ठी कु यो महत्वपूर्ण परयास छ। समग्र आयोजनल लोकभाषा, साहित्य, लोककला, सामाजिक सेवा अर आध्यात्मिक चेतना तँइ एक मंच पर एकजुट एकमुठ कैरिक दिल्ली मा उत्तराखंड अर नेपाल की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण अर संवर्धन की दिशा मा सारथक मैतरी रैबार देइ।
संगोष्ठी मा जौं दो दर्जन से जादा पुस्तकों कु विमोचन कर जौं फर समीक्षात्मक चर्चा हेइ, उल्लेखनीय छन- हायकू काव्य संग्रह (चर्चा)- गोविंद राम पोखरियाल ‘साथी’ (लेखक); ग्येड़ गांठि (चर्चा) जबर सिंह कैंतुरा (लेखक); कला अर कविता (विमोचन/चर्चा) – सुशील बुड़ाकोटी ‘शलांचली’ (लेखक); घचाक (विमोचन/चर्चा)- संदीप गढ़वाली घनशाला (लेखक); अनचाहा मेहमान कैंसर और सिंदूर (विमोचन/चर्चा) – डॉ रामेश्वरी नादान (लेखक); देवलगढ़ (विमोचन/चर्चा) कमल रावत (लेखक); मेरी नाटक मेरी कविताएं (चर्चा)- मंगतराम धस्माना (लेखक); विज्ञान कथा एक परिचय और कंडाली धूप (विमोचन)- डॉ हेमा जोशी ‘हिमाद्रि’ (लेखक); घार बूण (चर्चा) दर्शन सिंह रावत (लेखक); पता नहीं क्यों (विमोचन /चर्चा) – सुरेंद्र सिंह रावत ‘लाटा’ (लेखक); गीत जो लिख्यां छन (चर्चा) गिरधारी सिंह रावत (लेखक); वेदना हुई प्रखर और प्राकृतिक चिकित्सा के आयाम (विमोचन /चर्चा)- डॉ पृथ्वी सिंह केदारखंडी (लेखक); बात हौरि च (चर्चा) अनूप रावत
(लेखक); सुनो प्रियतम (चर्चा) कुसुम चौहान; जै जिया (चर्चा)- मदन मोहन सती (लेखक), लक्ष्मी रावत (नाटक डायरेक्टर); घंघतोल (फिल्म चर्चा)- सुशीला रावत (फिल्म डायरेक्टर); मरीचिका द दृष्टि भ्रम’ (विमोचन) जोगा राम आर्य ‘अनमोल’ (लेखक); काव्य संग्रह ‘तीस’ (चर्चा) – संदीप रावत (लेखक); कन्हैया पसबोला की जादूगरी का परिचय, नाटक संग्रह ‘तिर्मुड्या’ (चर्चा)- गजेंद्र नौटियाल (लेखक); अनोप नेगी खुदेड़ के नवाचार उद्यम पहाड़ी फूड का परिचय; हुंयाळ (चर्चा)-डॉ बिहारी लाल जालंधरी (लेखक); प्रकृति का चितळा कवि चंद्रकुंवर बवाल का रचना संसार पर परिचर्चा।
संगोष्ठी मा पजल परिवार द्वारा कर्यों 16 अष्ट धाम और 4 एकल धाम (कुल 132 पजल धाम) यात्राओं पर पजल यात्रियों द्वारा संस्मरणात्मक वक्तव्य भी हेनि। लगभग 45 पजल धाम यात्री भी श्रीमान्य हे चुकीन, जौंमा रमेश चंद्र घिल्डियाल, जयपाल सिंह रावत, झाबर सिंह रावत, सुशील बुड़ाकोटी ‘शैलांचली’, जबर सिंह कैंतुरा, दीवान सिंह नेगी, युगराज सिंह रावत, इंद्रजीत सिंह रावत, कल्याण सिंह चौहान, नागेंद्र सिंह रावत, भूपेंद्र सिंह बृजवाल, भूपेंद्र सिंह बिष्ट, विजय कुमार पैन्यूली, राम सिंह बिष्ट, दर्शन सिंह रावत, पयाश पोखड़ा, डॉ पृथ्वी सिंह केदारखंडी, दिनेश ध्यानी, अनिल पंत, सुनील भट्ट, दीपक ममगाईं, जसवीर जस्टिस, महावीर सिंह नेगी, सतीश रावत, संदीप गढ़वाली (घनशाला), सुल्तान सिंह तोमर, पूनम तोमर, गजेंद्र सिंह तोमर, डॉ राकेश भट्ट, सुधीर सुंद्रियाल, जगमोहन डांगी, कमल रावत, रमेश हितैषी, रोशन लाल, नरेश कुमार भारती, श्रीकृष्ण उनियाल, साईनीकृष्ण उनियाल, हरीश जुयाल कुटज, राकेश खंतवाल, पियूष शर्मा, डॉ कुसुम भट्ट ‘शोभनी’, सावनी एवं सारथी- विनोद गौड़, चंडी प्रसाद गौड़, देवेंद्र सिंह, दर्शन सिंह रावत इत्यादि उल्लेखनीय छन।
संगोष्ठी मा नेपाली मा डॉ देवेंद्र भट्ट, जौनसारी मा खजान दत्त शर्मा अर चारु रावत, कुमाउनी मा डॉ पीताम्बर अवस्थी, दीपा पंत अर गढ़वाली मा ओम ध्यानी, रोशन लाल ‘हिंद कवि’, वीरेंद्र जुयाल ‘उपिरि’ समेत रचनाकारोंन कि सुंदर काव्य परस्तुति रैइ। संगोष्ठी मा. मंजुला अवस्थी, शशि जोशी, कमला रावत, निर्मला रावत, आशा नेगी, जयपाल सिंह रावत, चंदन प्रेमी, खुशहाल सिंह बिष्ट, पार्थसारथि थपलियाल, जबर सिंह कैंतुरा, डॉ पृथ्वी सिंह केदारखंडी, विश्वेश्वर प्रसाद सिल्सवाल, उमेश बंदूणी, ओम प्रकाश पोखरियाल, रमेश सोनी, इंद्रजीत सिंह रावत, नागेंद्र सिंह रावत, भूपेंद्र सिंह बिष्ट, डॉ सत्यनारायण अंगिरा विश्वबंधु, इंदिरा प्रसाद उनियाल, संदीप गढ़वाली (घनशाला), रविंद्र गुडियाल, दिग्विजय बिष्ट, राम सिंह (जयाड़ा) रावत, हरीश असवाल, हुकम सिंह तोपाल, जितेंद्र बिष्ट, महावीर बिष्ट, रविंद्र सिंह पंवार, किशन सिंह गुसाई, चमन सिंह रावत, रमन ध्यानी, आनंद कुमार, त्रिलोक सिंह कड़ाकोटी, श्याम सुंदर सिंह कड़ाकोटी, बहादुर सिंह बिष्ट, वीरेंद्र सिंह बिष्ट, आनंद कुमार, अभिषेक गुसाई, राजेंद्र सिंह इत्यादि साठेक साहित्य प्रेमियों की गरिमामै धाकण धरै रैइ।
