(भीष्म कुकरेती)
म्यार जसपुर संबंधी लेखों बँचनेरों न मैं पूछ कि बल मि बार बार निर्यात की क्या अर किलै चर्चा करदो। तो सरल बात च। यदि जसपुर का शिल्पकार अपर सेवा निर्यात नई करदा या बहुगुणा लोक अपर सेवा भैर दुसर गाँवों तैं नि दींदा तो जसपुर म भयंकर आर्थिक संकट ऐ जांद तो द्वी बात हूंदी कि लोक हर पांच वर्ष म जसपुर छोड़ी चल जांदा।
जसपुर म बीसवीं सदी म उत्तरार्ध म हुस्यर बाडा (स्वर्गीय हंसराम आर्य ) प्रसिद्ध शिल्पकार हुयेन। हुस्यर बाडा (स्वर्गीय हंसराम आर्य ) को परिवार जसपुर वलों तैं बि सेवा दींदा छा अर सेवा निर्यात बि करदा छा।
हुस्यर बाडा (स्वर्गीय हंसराम आर्य ) क दादा जी तैं जखमोला परिवार न गटकोट से लैक जसपुर म बसाई छौ। हुस्यर बाडा (स्वर्गीय हंसराम आर्य ) क दादा जी तैं नाथ म भूमि बि दे छे व उखम क खड़ीक बि प्रसिद्ध छौ। इन बुले सक्यांद कि हुस्यर बाडा (हंसराम आर्य जी ) जखमोलाओं क पारम्परिक लोहार छा।
हुस्यर बाडा (हंसराम आर्य जी ) दक्ष लोहार क अतिरिक्त नाई बि छा। हुस्यर बाडा (हंसराम आर्य जी ) क चार लड़िक (भरोसा , पुरना , आनंदी अर श्यामलाल जी ) मदे भरसा दा अर पूर्णा दा (भरोसा नंद आर्य जी व पूर्णा नंद आर्य जी ) या तो दुसर गाँव वळों क ओडगिरी म व्यस्त रौंद छा या ग्वील बड़ेथ म कृषि तकनीक सेवा म व्यस्त रौंद छा अर जसपुरा आर्थिक दशा सुधार म योगदान दींदा छा।
हुस्यर बाडा (हंसराम आर्य जी ) एक सरल , सौम्य प्रकृति क मनिख छा। एक बात आज बि आश्चर्यजनक लगद कि सरा क्षेत्र म जब सबों घर पटाळ से छंया छा तो दक्ष शिल्पी ह्वेक बि हुस्यर बाडा (हंसराम आर्य जी ) क कूड़ क छत घास से छायीं रौंद छे।
हुस्यर बाडा (हंसराम आर्य जी ) अर ऊंको परिवार जखमोलाओं क पारम्परिक शिल्पी , अपर शिल्प सेवा , नाई कार्य व राजमिस्त्री कार्य निर्यात हेतु सदा याद करे जाल।
