रंत रैबार ब्यूरो।
नई दिल्ली 1 फरबरी, 2026 खुणि उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली द्वारा दिल्ली पैरामेडिकल एण्ड मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट का सहयोग से डीपीएमआई सभागार, न्यू अशोक नगर म उत्तराखण्ड का सुप्रसिद्ध लोकगायक, गीतकार, नाटककार जीत सिंह नेगी जी कि 99 वीं जयंती की पूर्व संध्या परैं नेगी जी का गीतों से वों तैं पुष्पांजलि दिएगे। ये मौका परैं डीपीएमई का चेयरमैन डॉ विनोद बछेती ला बोलि कि जीत सिंह नेगी जी द्वारा हमरा लोक का खातिर जु काम करेगे वे से नै पीढ़ी तैं परिचित हूण जरुरी च। वोन बोलि कि आज सबसे बड़ी जरुरत यी च कि हम अपरी पुराणी थाती तैं नै पीढ़ी का वास्ता संज्वेकी रखां।
उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली एक संयोजक श्री दिनेश ध्यानी ला बोलि कि स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी शताब्दी वर्ष समारोह आज बिटिन शुरू ह्वेगेंन। हमरी कोशिश रालि कि पूरा साल नेगी जी परैं कुछ न कुछ आयोजन हूणा राला। ये बीच म जीत सिंह नेगी शताब्दी समारोह समिति कु गठन करला ताकि सब आयोजन सुचारु व बढ़िया कैकी सम्पन्न होवन अर अगला साल 2 फरबरी, 2027 खुणि विराट आयोजन होलु। श्री ध्यानी ल बोलि कि स्वर्गीय जेट सिंह नेगी जी ही वो सौब से पैला गायक छाया जौंका का गीतों का ग्रामोफोन रिकॉर्ड 1949 म यंग इंडिया ग्रामोफोन कंपनी न सौब से पैली जारी करीं । स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी रेडियो का बी सौब से पैला गढ़वाली लोकगायक मने जांदन। आल इण्डिया रेडियो बिटिन भी नेगी जी का गीत व नाटक ‘शाबासी मेरो मोती ढांगा’ सौब से पैली प्रसारित ह्वेन।
स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी कु लोकप्रिय गीत 1950 के दशक का शुरूआत म रेडियो से यु गीत ‘तू होली उंचि डांड्यूं मा बीरा-घसियारी का भेष मां-खुद मा तेरी सड़क्यां-सड़क्यों रूणूं छौं परदेश मा। ता देश, प्रदेश व उत्तराखण्ड का घर, गौं म जख बि वे जमन म रेडियो छौ, जैन बि यु गीत सुणी सौब मन्त्रमुग्ध ह्वेगें न।
बरिष्ठ रंगकर्मी/साहित्यकार दर्शन सिंह रावत ला स्वर्गीय जीत सिंह नेगी कु जीवनपरिचय सबका समणी राखी। नेगी जी को जन्म , 2 फ़रवरी, 1925 जन्म भूमि पौड़ी गढ़वाल का अयाल गौं म ह्वै। अर नेगी जी की मृत्यु 21 जून, 2020 खुणि ह्वै। स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी का बुबा जी कु नौ स्वर्गीय सुल्तान सिंह नेगी व माताजी स्वर्गीय रूपदेवी नेगी छाया। स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी की पत्नी कु नौ श्रीमती विमला नेगी छौ। नेगी जी का बूबा जी वे जमना म सरकारी सेवा म छाया वो करांची, बर्मा आदि जगों अपरा बूबा का दगड़ी गेन वख नेगी जी की पढ़ै बि ह्वे। बर्मा बिटिन नेगी जी का पैली गीत रिकॉर्ड ह्वेन।
स्वर्गीय जीत सिंह नेगी क निर्देशन म 1954-1955 में दिल्ली म आयोजित गढ़वाली नाटक ‘भारी भूल’ कु मंचन ह्वै । कै कलाकार नेगी जी की टोली से वे जमन म जुड्या रैन ।जीत सिंह नेगी उत्तराखंड क यना पैला लोकगायक छाया जौंका गीतों का ग्रामोफोन रिकॉर्ड 1949 म जारी ह्वै छौ । जीत सिंह नेगी ला द्वी हिंदी फिल्मों म भी बतौर सहायक निर्देशक कु काम कैरी। नेगी जी संगीतकार व रंगकर्मी भी छाया । वो पैला यना गढ़वाली लोकगायक छाया जौंका गीत कु ऑल इंडिया रेडियो से पैली दौं प्रसारण ह्वे ।
स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी कु लोकप्रिय गीत 1950 के दशक का शुरूआत म रेडियो से यु गीत ‘तू होली उंचि डांड्यूं मा बीरा-घसियारी का भेष मां-खुद मा तेरी सड़क्यां-सड़क्यों रूणूं छौं परदेश मा। ता देश, प्रदेश व उत्तराखण्ड का घर, गौं म जख बि वे जमन म रेडियो छौ, जैन बि यु गीत सुणी सौब मन्त्रमुग्ध ह्वेगें न।
नाटकों की बात करदा ता स्वर्गीय जीत सिंह नेगी का निर्देशन म 1954-1955 म दिल्ली म आयोजित गढ़वाली नाटक ‘भारी भूल’ का मंचन ह्वै । मुंबई-दिल्ली-चंडीगढ़ समेत देश क कई प्रमुख नगरों म वे दौर म जीत सिंह नेगी का गीत अर नाटक श्रोताओं-दर्शकों तैं मंत्रमुग्ध ता करदा ही छाया। लोगों की जिकुड़ी म कुतग्यळि बि लगौंदा छाया। वे जमन म लोगों तैं जब जीत सिंह नेगी जी अर नाटकों ला गढ़वाल का जान-जीवन का अछूता भावों तैं संगीतमय कैरी ता लोगों का जिकुड़ों बिटिन वा खुद, भाव सदन्नी खुणि छप्प छपेगेन। लोक संस्कृति, लोक गीत अर लोक जीवन तैं ज्यूण वळा हिमालय जना विराट मनीषी जीत सिंह नेगी कु निधन 21 जून, 2020 खुणि धर्मपुर, देहरदून म ह्वै।
ये मौका परैं उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली की पहल तैं दुबारा याद दिलोंद मंच का समन्वयक श्री अनिल कुमार पंत न बोलि कि लोक का यना जणगुरु व लोक थाती का युगपुरुष स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी की सौवीं जयंती परैं क्वी विराट आयोजन उत्तराखण्ड की धरती म हूण चैन्द। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली की पुरजोर मांग छ कि उत्तराखण्ड सरकार तैं जीत सिंह नेगी जी की जयंती परैं विराट आयोजन कं चैन्द। हमारा लोक का गीतकार, गायक व स्वनामधन्य कलाकार बि अगनै ऐकी जीत सिंह नेगी जी की सौवीं जयंती तैं यादगार बणाणा पूरी कोशिश कारला।
ये मौका परैं उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली व दिल्ली पैरामेडिकल एन्ड मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट द्वारा आयोजित ग्रीष्मकालीन भाषा शिक्षण कक्षाओं केंद्रों का प्रबंधक, सहयोगी व सदस्यों कु सम्मान बि करेगे। समाज का कै गणमान्य लोगों द्वारा उक्त सम्मान प्रदान करेगेन। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली की पूरी कोशिश च कि अगला साल जीत सिंह नेगी जी की सौवीं जयंती परैं विराट आयोजन हो
पूर्व आईएएस अधिकारी डीएम कुलानन्द जोशी, कवि जयपाल सिंह रावत, दर्शन सिंह रावत, रमेश चन्द्र घिल्डियाल सरस, दिनेश ध्यानी, डॉ रूचि राणा, बृजमोहन वेदवाल, निर्मला नेगी, दयाल नेगी, रेखा चौहान, नेत्र सिंह असवाल, दीनदयाल बन्दूणी, चन्दन प्रेमी, दिग्पाल कैंतुरा, सुशील बुडकोटी, दीवान सिंह नेगी रिंगूण, जगमोहन सिंह रावत जगमोरा, अनूप रावत, सागर पहाड़ी, द्वारिका चमोली, भगवती प्रसाद जुयाल, सुशील बुडाकोटी,रामेश्वरी नादान, अनिल कुमार पंत, जबर सिंह कैंतुरा, संदीप गढ़वाली, गोविन्द राम पोखरियाल साथी, वीरेंद्र कुमार, मुकेश कुमार, प्रदीप बौंठियाल, रमेश कुमार , रेखा चौहान, दयाल नेगी, दिग्पाल कैंतुरा, आदि लोग उपस्थित छाया।
कार्यक्रम कु संचालन दिनेश ध्यानी, दयाल नेगी, नीरज बवाडी ल कैरि।
