रंत रैबार ब्यौरो..…
कैबि शांत प्रकृति का रूप मा पछयाण रखण वळि दुनघाटी ध्वनि प्रदुषण कि चपेट मा छ। सुबेर बटी रात तक राजधानी सड़क्यूं अर मौहल्लों को प्रेशर हार्न बरजोंदा वाहन चालक जनता कि मुसीबत का कारण बण्या छन। सुस्त व्यवस्था को फैदा उठौण वळा मामूली स्कूटी चालक बि प्रेशरे हार्न लगैकि अपणि शान समझी लोग्वी ज्यान की आफत। बण्यां छर्ने।
आंकड़ा बतौंदन कि दून मा ध्वनि प्रदुषण को मानकौ स्तर सीमा से भौत एच चल जांद। अब चै वो आवासीय क्षेत्र हो चै औद्योगिक जोन वखौ निर्धारित धवनि प्रदूषण तैं मानकों से भौत जादा रिकार्ड करे ग्ये। रात दिन वाहनों से पैदा होण वळो ध्वनि प्रदूषण त छै हि छ वेडिंग प्वाइंट्स अर धार्मिक आयोजनों से पैदा होण वळो हल्ला बि ध्वनि प्रदूषण का मनकों मा वृद्धि कन मा मददगार होणा छन।
ध्वनि प्रदूषण का प्रति जागरूकता कि कमी अर नागरिक बोध को अभाव जादा जिम्मेदार छ यांसे जादा बोधहीनता क्य होलि कि साइलेंस जोन मा बि वाहनों को हार्न बजदा सुणे जांदन। जबकि बाकायदा सड़क्यूं मा हार्न नि बजौगों संकेत लिख्यां रैंदन अस्पतालों का पास, स्कूलों अर धार्मिक स्थलों का पास होर्न नि बजौणा संकेतों कि अनदेखी कर्दा वाहन चालक अपणि बेवकूफी अर अनाडीपन को परिचै देंद द्यखे जै सकदन। पार्क, स्कूल आदि शांत क्षेत्रों से गुजरदा वाहन जाणबूझी होर्न बजैकि शांत वातावरण भंग कर दिंदन। जरूरी नी छ कि वि सड़क पर भीड़ हो सिरफिरा वाहन चालक खाली सड़क मा बि सुद्ध मुद्धि हॉर्न बजैकि अपणि मूर्खता य डिफॉल्टर वाहनों तैं तेज चलैकि इंजन को शोर बि ध्वनि प्रदूषण का मानको तैं प्रभावित कर्दन ।
यीं सर्य फजीहत को कारण संबंधित प्रदूषण नियंत्रण विभाग कि गैर जिम्मेदारी छ। किलै कि अबि तक यूंकि सक्रियता का उदाहरण द्यखणो नि मिल्य। बजार मा चल्दा वाहनों से प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र दुयखण तके सीमित प्रदूषण नियंत्रण विभाग कि समझ मा वायु प्रदूषण परीक्षण का साधन त छन् पर ध्वनि प्रदूषण मापक होणा बावजूद व वृंको इस्तमाल कन से डरदा छन। विभागीय स्टाफ का समणि बिना साइलेंसर का वाहन धड़ल्ले से गुजर जांदन। खासतौर पर बलेट मोटर सैकिल्यों को कानफोड् हल्ला सुण्ना का बावजूद् आंख कान बंद कर दिंदन।
घ्वनि प्रदूषण का मामला मा देहरादून न शहरी क्षेत्र दिल्ली मुम्बई जना मेट्री पोलिटन सिटीज कि बरोबरी कन बैठ गये। दून को आकार भले ही युं शहरों कि अपेक्षा छवट छ। यख वाहनों कि व संख्या बि अपेक्षाकृत कम छ। पर अगर -वनि प्रक्षण कि बात करे जाव त यखे स्थिति यं महानगरों तैं टक्कर देण वळीं रेकार्ड करे जाणी छ। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कि एक रिपोर्ट को मुताबिक दिल्ली- मुम्बई समेत सात महानगरों मा जथगा ध्वनि प्रदुषण के स्तर दून मा कमोवेश वृंका बरोबर रिकार्ड करे ग्ये। दूनं का कुछ इलाका त यिना नलिन जख यूं महानगरों स जादा ध्वनि प्रदूषण पाये ग्ये। हालात य छन कि न को प्रदूषण नियंत्रण विभाग दिल्ली कि अपेक्षा जादा गैर जिम्मेदार साबित होणू छ।
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एजीटी) का आदेश का मुताविक दिल्ली का प्रदूषण नियंत्रण विभागने एक वेबसाइट तयार करीं छा जैं पर क्की बि नागरिक ध्व्वने प्रदूषण पर अपणि शिंकेत य सुझाव द्ये सकद। व्यवस्था कि खूबी या छ कि शिकैत का 30 मिनट का भितर सम्बधितों पर कार्रवै अमल मा ल्हये जै सकलि । यथीं बातै जिम्मेदारी पुलिस थाणों तें दिनी छ। यांक विपरीत दून जना शांत अर सीमित क्षेत्रफल वळा महानगर का यिनि क्वी कोशिश अमल मा नि ल्हये जाणी छा अफसोस यीं बातौ छ कि उत्तराखण्ड पर्यावरण संरक्षण मा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तैं एनजीटी का निर्देशों कि भणक तक नी छ। न हि शासन स्तर पर ये संबंध मा क्वी कार्रवै कि जर्वत समझे जाणी छ। जरूरत छ प्रदूषण नियंत्रण कानून तैं सख्ती सि अमल कन्नै कि।
