(रतनसिंह किरमोलिया द्वारा)
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डीडीहाट, बाल प्रहरी/बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा क संयुक्त तत्वावधान में डायट डीडीहाट म’ बाल साहित्य और बच्चे ‘ विषय पारि आयोजित तीन दिनी राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठौ हे। ‘ उत्तराखंड का बाल साहित्य विषय पारि पैल सत्र क मुख्य अतिथि उत्तराखंड भाषा संस्थान क सदस्य, पहरू क पैल संपादक डॉ हयातसिंह रावत ल कौ कि वैश्वीकरण शहरीकरण एवं संयुक्त परवारों के विघटनल नाना कैं दादा दादी नाना नानी क प्यारे नि मिल पौणय। नान प्रकृति है दूर हनै जाणई। य सत्र क अध्यक्ष रतनसिंह किरमोलिया ल सबन स्वागत करणक दगड़े उत्तराखंड कि बाल साहित्य कि पृष्ठभूमि पारि बात धरै और बता कि अल्याड़ बटी 1936 के आसपास ‘नटखट’ असि बाल पत्रिका प्रकाशित ह्वे। डायट क प्राचार्य भास्करानंद पांडेय सबन क स्वागत करौ अर आपण संस्थान कि गतिविधियों कि जानकारी दे। उनूल कौ कि नानाकि
लिजी लेखण बखत बाल मनोविज्ञान क ध्यान धरण पड़ल। उनूल कौ कि देशक विभिन्न क्षेत्रों बटी आई बाल साहित्यकारों क अनुभव और ज्ञान हमार प्रशिक्षुओं क लिजी महत्वपूर्ण हृल। य सत्र म डॉ चंद्रकला वर्मा डॉ धाराबल्लभ पांडेय डॉ गोविंदसिंह धपोला आदि विद्वानों ल आपण आपण बिचार धरौं।’ बाल साहित्य अर सोशल मीडिया’ बिषय पारि दुसर सत्र कि अध्यक्ष एस एस जीना विश्वविद्यालय कि पूर्व शिक्षा संकायाध्यक्ष डाँ विजया ढौंढियाल ल कौ कि मोबाइल युगक दौर में पठन पाठन कि संस्कृति कम हनै जाणै।
उनूल कौ कि सयाणां कैं एक शिक्षक, एक अभिभावक और एक साहित्यकार बतौर खुद लै पढ्नकि आदत बणूण पड़लि। मुख्य अतिथि डॉ चित्रेशल कौ कि बखत बखत पारि गैर शैक्षणिक गतिविधियों कैं अपनूण कि और अघिल बढूणकि जरवत छु। धनबाद बटी आई हेमंत जायसवाल ल कौ कि मोबाइल आजकि भौत जरवतकि बस्तु है गे। लेकिन यैक सदुपयोग हुण जरूड़ी छु। संपादक लखन
प्रतापगढ़ी ल बाल पत्रिकाओं कै’ अभिव्यक्ति क सशक्त माध्यम बता ।य सत्र कैं डॉ इंदु गुप्ता आर के साहू लै संबोधित करौ।
राइका डीडीहाट क प्रधानाचार्य प्रेमसिंह पापड़ाकि अध्यक्षता म ब्यालक बखत अखिल भारतीय बाल कवि गोष्ठी ह्वे। जमें यां क और भ्यैर बटी आई तीन दर्जन कवियों ल आपणि आपणि कविता सुणाई।
य राष्ट्रीय संगोष्ठी में डायट डीडीहाट क पूर्व प्राचार्य डी एस पांगती, डॉ अशोक पंत, डायट अल्माड़क पूर्व प्राचार्य गोपाल गैड़ा, बा सा सं सिरसाक निदेशक डॉ शील कौशिक, बाल किरण क संपादक लाल देवेंद्र इस, रजनीकांत, अभिक कुमार (त्रिपुरा), कन्हैयालाल साहू (छत्तीसगढ़), बाल वाटिका की उपसंपादक रेखा लोढ़ा (भीलवाड़ा), कर्नल प्रवीण शंकर त्रिपाठी (नोएडा), गोकर्ण लोहिया, पुनीत जोशी, ममता खोलिया, राजेश पाठक, डा सतीश चंद भगत (बिहार), कुसुम चौधरी ( लखनऊ), डा. सत्यानन्द बडोनी (देहरादून), गरिमा राणा और डॉ महावीर
रवांल्टा (उत्तरकाशी), प्रकाश तिवारी, उदयभान सिंह, डा रामदुलार पराया, डा राम प्यारे प्रजापति, मोहम्मद इस्लाम, नरेश मौर्य, केपीएस अधिकारी, रमेश चंद्र पांडेय बृजवासी, हेम पंत (किताब कौतिक), और स्थानीय साहित्यकार मिलै बेर डेढ़ सौ बाल साहित्यकार मौजूद रई।
कैं रत्तै परक सत्र में पक्षी विशेषज्ञ राजेश भट्ट ल उत्तराखंड कि जैव विविधता और किसम किसमक पथीलों क बारम सबन भलि जानकारी दे। संगोष्ठी में देशा क 90 दुर्लभतम बाल पत्रिकाओं की प्रदर्शनी सबन है आकर्षक रै। डायट क 80 प्रशिक्षुओं क प्रोजेक्ट अर उनरि द्वारा निर्मित हस्तलिखित पुस्तकों कि प्रदर्शनी लै भौत आकर्षक है। बाल लेखन कार्यशाला में प्रतिभागी इस्कूली नाना लै हस्तलिखित पुस्तक तयार करी। सबै साहित्यकारोंल इनरि लै भौत तारीफ करै।
आखरी दिन आखरी सत्र म देशाक चयनित डेढ़ दर्जन विद्वान साहित्यकारों कैं बाल साहित्य कैं उनर द्वारा देई अवदानकि लिजी सम्मानित करी गो।
गोष्ठी में विभिन्न साहित्यकारोंक एक दर्जन है सकर किताबों क विमोचन करी गो। गोष्ठी क विभिन्न सत्रों क संचालन नरेंद्र पाल सिंह, डा खेमकरण सौमन, अ मंजू पांडेय उदिता, डा महेंद्र सिंह राणा, नीरज पंत, रेखा, दीक्षा जोशी, डा आशुतोष सती आदि विद्वानों ल करौ। बाल कविता पाठ और बाल कहानी वाचन के बाद मौजूद श्रोता नानतिनाल समीक्षात्मक टिप्पणी करै। संगोष्ठी में मौजूद सबै विद्वान साहित्यकारों ल डायट डीडीहाट क प्राचार्य भास्करानंद पांडेय अर बाल प्रहरी क संपादक उदय किरौला क कार्य और सहयोग कि मुक्तकंठ भूरि भूरि प्रशंसा करै।
य राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी म भास्करानंद पांडेय ज्यू द्वारा देई गो सहयोग क लिजी उनूकैं बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा कि तरफ बटी शॉल ओदै बेर सम्मानित करी गो।
य तीन दिनी राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी क उद्यापन के बखत बाल प्रहरी क संपादक उदय किरौला ल सबै अतिथि साहित्यकारों क आभार व्यक्त करौ।
