गढ़वळि लोकप्रिय साहित्य विकासम रुपेश कुकरेती क मिळ्वाक (योगदान )
भीष्म कुकरेती
गढ़वळि म लोकप्रिय /सड़क छाप (बिंडी पढ़े जाण वळ ) , पॉपुलर साहित्य की शुरुवात दिखे जाव तो दैनिक गढ़वाली ऐना प्रकाशन को उपरान्त ही शुरू ह्वे जब समाचार व कुछ हौरी लोकप्रिय साहित्य जनकि बच्चों कुण पजल साहित्य , चुटकला , विश्व का आस्चर्य युक्त जानवर व वनस्पति आदि (सब भीष्म कुकरेती व पजल चित्र रमाकांत कैंथोला द्वारा ) साहित्य छपण शुरू ह्वे।
‘गढवाली धै’ साप्ताहिक कुछ सीमा तक लोकप्रिय साहित्य छपद छौ (करोड़पति बणो श्रृंखला ) तो खबर सार म बि कोशिस हूंदी छे।
रंत रैबार साप्ताहिक न सबसे बिंडी पॉप्युलर लिटरेचर छप।
पैल माध्यम नि छा तो पॉपुलर लिटरेचर की समस्या छे। इंटरनेट आण पर माध्यम की समस्या कम ह्वे या व्यापक माध्यम मील तो गढ़वाली पॉपुलर लिटरेचर म बि गति आयी जनकि भीष्म कुकरेती द्वारा ब्लोग्स व इंटरनेट मेल ग्रुपों म गढ़वळि भोजन पाककला आदि। सोशल मीडिया जनकि फेसबुक उपलब्ध हूण पर जोक्स आदि साहित्य म वास्तव म गति आयी। व्यंग्य चित्र म व्यंग्यत्मक कमेंट्री को भी प्रचलन शुरू ह्वे। फेसबुक म लाल चंद निराला को काम प्रशंसनीय च चुटकलों तै प्रसार प्रचार करणो अर लाल चंद निराला।
इनम बड़ी संख्या म लोकप्रिय साहित्य तै विकसित करण वळो पौध लग जांमाँ सरोज शर्मा , अनीता नैथानई ढौंडियाल , उषा बिजल्वान को नाम बिंडी च जौन गढ़वळि लोकप्रिय साहित्य तैं सज संवार।
इनि छन पोस्ट ग्रेजुएट ,, 1980 म जसपुर (द्वारीखाल ) म जनम्यां रुपेश कुकरेती जौन गढ़वळि लोकप्रिय साहित्य म अपर अभिनव योगदान दे। रुपेश कुकरेती न विदेशों म शिक्षा कन पाण विषयों पर रंत रैबार व इंटरनेट म निम्न लेख प्रकाशित कौरि नव पाठक वर्ग बणाइ –
विदेश म शिक्षा को महत्व
यूनाइटेड म शिक्षा
स्विट्जरलैंड म शिक्षा
ऑस्ट्रेलिया म शिक्षा
न्यूजीलैंड म शिक्षा
फ़्रांस म शिक्षा
सिंगापूर म शिक्षा
आयरलैंड म शिक्षा
एमबीए की विदेशों म शिक्षा
एमबीबीएस की शिक्षा
तकनीक शिक्षा विदेशों म
होटल मैनेजमेंट की विदेश म शिक्षा
लेख युवा वर्ग तेन आकर्षित करणो हेतु लिखे गे छा।
रुपेश कुकरेती शिक्षक छन तो भाषा सरल व समझ म आवो वळ भाषा च।
