(भीष्म कुकरेती) लोकसाहित्य म योगदान
गढ़वळि म द्वी प्रकारौ साहित्यकार छन एक छन जौं तैं उपाधि दिए जांद ‘सम्राट’ , महाराजा आदि अर तौक गां वळ बि नि जणदन सी क्या लिखदन। दुसर प्रकारा साहित्यकार चुपचाप , बिन हल्ला कोरी गढ़वळि साहित्यै सेवा करणा छन अर एक विशेष प्रकारा बँचनेर (पाठक ) सृजित करणा छन। यि मौन साहित्यकार बिंडीतर इंटरनेट म छन। इनि एक गढ़वळि साहित्यकार छन श्रीमती अनीता नैथानी ढौंडियाल जो चुपचाप गढ़वळि साहित्य सेवा म संलग्न छन। यूंको साहित्य इंटरनेट , सोशल मीडिया अर रंत रैबार जन साप्ताहिक म पोस्ट हूणा रौंदन।
अनीता नैथानी ढौंडियाल को जन्म नैथानी परिवार म ५ मई १९६४ कुण गढ़सेरा (इड़वाल स्यूं , पौड़ी गढ़वाल ) म ह्वे। ग्रेजुएट अनिता को योगदान गढ़वळि ‘पॉपुलर साहित्य , ललित साहित्य या लोकसाहित्य रचण म च अर बिठलर पाठक बणानम महत्ति योगदान च।
अनिता ढौंडियाल पिछ्ला पांच छै वर्षों से लेखन कार्य म संलग्न च।
रंत रैबार साप्ताहिक व सोशल मीडिया म अब तक 26 से बिंडी पाक शैली संबंधी लेख , 20 से बिंडी उत्तराखंड का मंदिरों पर लेख, धार्मिक विषयी संबंधी 20 से बिंडी लेख अर दसेक रसोई विज्ञान या किचन संबंधी लेख पोस्ट /प्रकाशित ह्वे गेन।
गढ़वळि तैं यदि सामान्य जन तक पौंचाण तो पॉपुलर साहित्य की अति आवश्यकता च। ये ही उद्देश्य तै लेकि अनीता नैथानी ढौंडियाल पॉपुलर साहित्य रचण म व्यस्त च। अनिता न भूता सा नया बिठलर पाठक पैदा करिन अर भौत सा पाठकों तैं सदा हेतु गढ़वळि पाठक बणायी। अनिता को यु योगदान गढ़वळि साहित्य संसार नि बिसर सक्दो।
अनीता की भाषा सिरनगर्या च , सरल च। चूँकि अधिकतर विषय रसोई से संबंधी लेख छन तो धीरे धीरे अनीता नैथानी ढौंडियाल एक किचन लिटरेचर वोकेब्लरी तैयार करण म बि व्यस्त च।
