पिछला दिनु हिमालय मा बढ़दी आपदाओं की चिंता क बीच सतत विकास की चुनौतियों अर समाधान पर हिमालय राज्यों क विधायकों, वैज्ञानिकों अर विशेषज्ञों न गहन विचार विमर्श करि। जैमा बोलेगे कि हिमालय एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र छ यख जु बि नीति बणै जावन वे मा स्थानीय लोगु की भागीदारी सुनिश्चित करे जाव। यांका अलावा पारंपरिक ज्ञान पर आधारित हिमालय अनुसंधान, नवाचारों अर सबि हिमालय राज्य मा नीति निर्माण वास्ता एक समन्वित दृष्टिकोण की जरूरत छ। दिखे जाव त हिमालै हमर वास्ता जीवनदाता का रूप मा मन्ये जांद। हमर जीवन कि जादातर गतिविधि हिमालै का मिजाज पर निर्भर कर्दन। हिमालै सि ही बाढ़, हिमपात, भूकम्प अर प्राकृतिक संसाधनों को क्रम प्रभावित होंद, ये वास्ता भारतीय उपमहाद्वीप को वोटर टावर का नौ से प्रचलित हिमालै का संरक्षण वास्ता उच्च स्तरीय प्रयास करे जाण चैंदन।
मनख्यों न अपण स्वार्थपूर्ति का वास्ता प्रकृति का खज्यना को बुरी तरां दोहन कनु सीख यालि। हम हर संभव वींका प्रदत्त सुविधों कि आखिरी बूंद तक निचोड़ लेणै मानसिकता ल्हेकि प्रतियोगिता कना छां। मनखिन अपण दिमाग से प्रकृति कि हर सुन्दरता अर सुविधों को दोहन कनौ विज्ञान को सहारो ल्हेकि अपणि मंशा जाहिर कर्द।
कुदरत जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी अर आकाश पांच तत्वों को संगम छ। यूं हि पांच तत्वों से जीव, वनस्पति अर भू-मण्डल-सौर मण्डल अर अनंत अंतरिक्ष कि रचना होयीं छ। कखि मा क्वी तत्व जादा छ त कखि मा कम। पर वींका प्रावधान अनावश्यक नी छन। जख जथगा-जै तत्व कि जर्वत मैसूस करे ग्ये ठीक वीं तरां से वेकि रचना करे गये। मनखि प्रकृति का नियम कैदों से छेड़छाड़ कैरी वींका संतुलन तैं बिगड़नै कोशिश कनू छ। पर वो जादा दिन नि चल सकदी। यानि जखि कुछ अति होंद वो मनखि तैं अपणु नियम बिंगै देंद। किलैकि हर नियम अपण जगा मा अटल अर स्वयंसिद्ध छ। ये वास्ता मनखि कि हर कोशिश को क्लाइमेक्स बर्बादी ल्हेकि ऐ जांद। यानि अव्यक्त रूप से वो खतरै घण्टी बजैकि बींद कि बस यखि तक छ तेरी सीमा यांसे अगनै चलिल्यु त वो अतिक्रमण मने जालो। अर हर अतिक्रमण कि सज्य वो स्वयं तै कर्द। वो कै ढंग से मनखि तँ पाठ पढ़ाँद क्की नि बिंगे सकदो। कबि प्रकृक्ति आपदा का रूप मा त कखि महामारी का रूप मा कबि त कबि गृह संघर्ष का रूप मा वो मनखि तैं वेकि सीमा का आभास करौणी रैंद पर मनखि यातें विज्ञान कि कसौटी पर कसी एक सार्वभौम प्रक्रिया को नौ देकि कुदरत पर अपणु सिद्धांत थोपणै कोशिश कर्द। यानि जैन यूं घटनों पर तर्कयुक्त सिद्धांत को पर्याय साबित कर मनखि आज का जमाना मा सर्वरूप से विकसित अर बलवान मने जाणू छ।
निजी स्वाथों कि पूर्ति वास्ता जंगळों को अवैज्ञानिक दोहन अर अंधाधुंध कटान, नद्यों बटी बेहिसाब खनिज दोहन अर खासतौर पर पहाड़ों मा खेती किसाणी व्यवसाय मा औण वळि कमी हिमालै कि विराटता अर वेका वैभव पर सवालिया निशाण लगै दिंदन। ई वैश्विक चुनौती का समाधान वास्ता तत्काल ठोस सामुहिक प्रयास की जरूरत छ। तबी हमरू वर्तमान व भविष्य सुरक्षित रै सकलु । यां पर सिर्फ चिंतन मनन कन्न सि कुछ नि होण यांका वास्ता ठोस नीति बणणी होलि।
