(विशेश्वर प्रसाद सिलसवाल)
सात जलम साथ…..
श्रीमती जी – आज सी चार दाँत क्यांकू खुल्या छन, मोबाइल सुणद दफे।
श्रीमान जी – अरे पंडित सर्वेश्वरानंद शास्त्री
ज्योतिषचार्य जीक लाईव कार्यक्रम चलणु. बल जन्मतिथी अर समै बतेक अगळी जन्म की भविष्य वाणी सुणो ।
श्रीमती जी – मालूम मिते. रोज सुवेर आठ बजि आन्दु वेक कार्यक्रम. ब्याळी मिन भी पूछ एक सवाल।
श्रीमान जी – हाँ, हाँ, वी वी. बिलकुल सै बताणु भै. म्यार भूतकाल, वर्तमान भी. बिलकुल सौ प्रतिशत सही बताई गुरूजी न।
श्रीमती जी – पर तुमार सवाल क्या छै, अर वैकू उत्तर. जो इतगा खितगात मचयूं।
श्रीमान जी – अरे मिन पूछ कि.. पर तू बुरु नि मानि.
श्रीमती जी – ना ना.. उगलो।
श्रीमान जी- कि यू म्यार, यींक दगड व्योक पैलि जलम च कि आखिरी.. यानि अगळी जलम मा मिते क्वि सुंदर सुशील पत्नी मिळाली..
श्रीमती जी.. ओह! तो क्य बताई वूनं।
श्रीमान जी- बल सातों यानि आखिरी जनम.च तुमार एक साथ. तुम द्वि झणो क दम्पति रूप मा ???? छा ना.. बड़ी खुशीक बात.. पर
श्रीमती जी.. पर क्य ?
श्रीमान जी-अरे वो एथर बताणा छ्याई कि तैबरी म्यार फोन चार्ज खतम.
श्रीमती जी.. पर घबराण की क्वि बात नि. ब्याळी मिन भी यू ही सवाल पूछि छ्याई गुरू जी तै. अहा, छप छपी पोड़ी गे जिकुड़ी पर….
श्रीमान जी अच्छा फिर क्य बताई वेन. आखिर यू हमार जीवन को सवाल च।
श्रीमती जी.. बल छा तो यू सातों जनम तुम द्वियों क. पर वे आदिम को कंजूसी, आलस अर अत्याचार कू प्रदोष की दंड स्वरूप वे तै तुमार दगड सात जलम हौर बिताण प्वाडळ सुधार को वास्ता…
श्रीमान जी- हे ब्वे कन मोरि मि अगळी जलम भी..
