(विश्वेषर सिल्स्वाल)
श्रीमती जी -डॉक्टर साब, मिन अपरि तरफ बिटि भी आफिक कतना हि इलाज कैरि याल पर यूँक तबियत ठीक नि हूँणी.
डॉक्टर -ये गे भुलि फिर लौटिक मि मा.
श्रीमती जी -फंड फुको डॉक्टर साब पुराणी बात. माटू डालो.अब तुमन ठीक कन यूँ ते बस.
डॉक्टर -भौत पुराणी बीमारी च. ज्यांक डिप्रेशन च यूँ ते. यानि ब्यो से पैलिक.
श्रीमती जी – क्य कन अब.
डॉक्टर -गोवा घूमण को जाण प्वाड़ळ. यू ही आखिरी इलाज च यूँक डिप्रेशन दूर करणो.
श्रीमती जी -भौत सुंदर. ब्याळी यूँक पिंशन भी ये गे. मि धरमु मा हवाई जाहज की टिकट करांदु आज ही.
श्रीमान जी -डॉक्टर सहाब, पुरू दवे बताव यीं ते जरा.
श्रीमती जी -बताई तो याल.
डॉक्टर -हाँ हाँ, भैजी समझी गयूँ.
श्रीमती जी -क्य डॉक्टर साब.
डॉक्टर -मैडम, आप नहीँ जायेंगे, इनको अकेले ही गोवा की सैर करनी होगी पंद्रह बीस दिन.
श्रीमती जी -फुँड घार चलो, मि आफिक निकालदू गोवा की फैनी तुमार गिची बिटिक. मिते तो ये डॉक्टर पर पैलि बिटि शक छ्याई कि तुम द्वि मिल्या छंवा.
श्रीमान जी -हे ब्वे कन मोरि मि फिर आज….आज तो आखिरी इलाज नि ह्वा जन..
