नई दिल्ली। साहित्य अकादमी सभागार म डाक्टर रमेश पोखरियाल निशंक की कहानियों पर डेढ़ सौ एपिसोड म लगातार औन लाइन वाचन व समीक्षा करण वळा साहित्यकारों कु सम्मान समारोह उयेंगे।
ये समारोह म अध्यक्ष वरिष्ठ कवि अशोक चक्रधर, डाक्टर निशंक, इंडिया हैबिटेट सेंटर का चेयरमैन डाक्टर के जी सुरेश, साहित्य अकादमी का नवनियुक्त सचिव डाक्टर वरुण, डाक्टर अनिल जोशी, प्रोफेसर पाण्डेय, रवीन्द्र नाथ टैगोर विश्वविद्यालय का निदेशक अशोक कर्णावट समेत डाक्टर बेचैन क़डियाल, आसना कंडियाल नेगी, भारती अनन्ता आदि उपस्थित छाया।
ये समारोह देश का कोणाकोणों बिटिन अंया साहित्यकारों का दगड़ि साहित्यकार, उत्तराखण्ड लोक-भाषा
साहित्य मंच दिल्ली का संयोजक दिनेश ध्यानी, देवप्रयाग बिटिन वरिष्ठ साहित्यकार डाक्टर वीरेन्द्र बवाल, श्रीनगर बिटिन वरिष्ठ साहित्यकार नीरज नैथानी, जुगराण जी, कवियत्री निर्मला नेगी, कृपाल सिंह शीला, भारती अनन्ता, शान्ती बहुगुणा, डाक्टर ज्योत्स्ना संस्कृति मंत्रालय समेत कै साहित्यकार भाषा सेवियों तैं सम्मानित करेगे।
ये मौका परें डाक्टर बेचैन क़डियाल ला सब लोगों कु अपणा वक्तव्य से स्वागत कैरि। श्री कंडियाल न बोलि कि हमरि कोशिश लेखक गांव देहरादून का माध्यम से भाषा साहित्य की सेवा कन्न छ। हिमालय विरासत न्यास की अध्यक्षा आसना कंडियाल की मेनत से लगातार भाषाई सरोकारों पर काम हूणू छ। डाक्टर निशंक का साहित्य परेँ वों तैं हावर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड व वर्ल्ड बुक आफ रिकार्ड बि मिलीन ।
कार्यक्रम का अध्यक्ष अशोक चक्रधर ला निशंक जी की एक कहानी पाठ कैरि। लोन् ल बोलि कि डाक्टर निशंक जना साहित्य सेवी विद्वानों का ही कारण लेखक गांव जना अन्तर्राष्ट्रीय संस्थान आकृति लिंदन।
कार्यक्रम की संयोजिका आसना कंडियाल ल बोलि कि लेखक गांव का माध्यम से देश व दुनिया का साहित्यकार
व भाषा प्रेमी लोग जुटणा छन। हमरि कोशिश छ कि लगातार यना आयोजन हूण चंदन।
ये मौका परें डाक्टर रमेश पोखरियाल निशंक की एक किताब निशंक जी की कहानियों में यथार्थ व मूल्यबोध कु लोकार्पण बि ह्वे।
ये मौका परें हिमालय विरासत न्यास द्वारा डाक्टर रमेश पोखरियाल निशंक तैं
कथा सम्राट सम्मान से सम्मानित करेगे। कार्यक्रम कु कुशल संचालन प्रोफेसर वेदप्रकाश ला कैरि।
ये मौका पर उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच दिल्ली का संयोजक दिनेश ध्यानी ला उत्तराखण्ड बिटिन अंया साहित्यकारों से अलग से गढ़वाली, कुमाऊनी भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल कना खातिर व उत्तराखण्ड म गढ़वाली, कुमाऊनी, जौनसारी भाषा अकादमी कु गठन कन्न मा होलु यांका खातिर चर्चा कैरि। दगड़ि यह चिंता बि उठै कि जनु राजस्थान म सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजस्थानी भाषा तैं राज्य म मान्यता व पाठ्यक्रम म शामिल कना निर्देश दियां छन ता हम उत्तराखण्ड म गढ़वाली कुमाऊनी भाषाओं तैं कनक्वे मान्यता दिलै जौ ? क्या जतन करण चंद। यांका खातिर विचार विमर्श कैरि।
