श्रीमती जी डॉक्टर साब ! मिन अपरि तरफ बिटि भी आफिक कतना हि इलाज कैरि याल पर यूँक तबियत ठीक नि हूँणी.
मा. डॉक्टर – ये गे भुलि फिर लौटिक मि
श्रीमती जी – फंड फुको डॉक्टर साब पुराणी बात. माटू डालो. अब तुमन ठीक कन यूँ ते बस.
डॉक्टर भौत पुराणी बीमारी च. ज्यांक डिप्रेशन च यूँ ते. यानि ब्यो से पैलिक
श्रीमती जी क्य कन अब.
डॉक्टर – गोवा घूमण को जाण प्वाड़ळ. यू ही आखिरी इलाज च यूँक डिप्रेशन दूर करणो.
श्रीमती जी – भौत सुंदर. ब्याळी यूँक पिंशन भी ये गे. मि धरमु मा हवाई जाहज की टिकट करांदु आज ही.
सदाप गढ़वाली
श्रीमान जी – डॉक्टर सहाब, पुरू दवे बताव यीं ते जरा.
श्रीमती जी – बताई तो याल.
डॉक्टर – हाँ हाँ, भैजी समझी गयूँ.
श्रीमती जी – क्य डॉक्टर साब.
डॉक्टर – मैडम, आप नहीं जायेंगे, इनको अकेले ही गोवा की सैर करनी होगी पंद्रह बीस दिन.
श्रीमती जी – फुंड घार चलो, मि आफिक निकालदू गोवा की फैनी तुमार गिची बिटिक. मिते तो ये डॉक्टर पर पैलि बिटि शक छ्याई कि तुम द्वि मिल्या छंवा.
श्रीमान जी – हे ब्वे कन मोरि मि फिर आज…. आज तो आखिरी इलाज नि ह्वा जन..
