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रंत रैबार ब्यूरो…..
देहरादून। अमोला फैमिली रेस्टोरो मोथरोवाला देरादूण मा सौं-करार लोकभाषा साहित्यिक समिति टीरि का माध्यम से अर संस्था का संस्थापक अध्यक्ष अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी ‘का दिशा-निर्देशन मा दूसरी मासिक कविता विमर्श संगोष्ठी आयोजित ह्वे. बतौर मुख्य अतिथि कवि शिवदयाल बडोनिन करि। ‘शैलज’ रैन अर अध्यक्षता डॉ. सत्यानंद
संगोष्ठी मा सबि कवियों द्वारा गढ़वाळि कविता नयु विमर्श पर विशेष साहित्यिक सामूहिक संवाद हे जैमा कवियोंन अपणा-अपणा विचार रखिन। मुख्य अतिथि शिवदयाल शैलजन कविता मा नया परिवर्तन तैं स्वीकार कनै बात करि अर विचार प्रधान कविता कि रचनात्मकता पर ज्यादा जोर दिन्नी।
डॉ. सत्यानंद बडोनिन पुराणा मूल्यों तैं कविता मा संजोण कि बात, काव्यशास्त्री छंद कि बात करि अर नई कविता कि जरूरत पर बात पर जोर दिन्नी तोंन अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी ‘द्वारा कार्यक्रम कि प्रशंसा बि करि।
अपणि बात मा दीपक सती प्रसादन कविता का स्वतः स्फूर्ति भाव पर जोर दीक बोलि कि कविता मा कवि पर भैर बिटि दवाब से कविता मा भटकाव पैदा होंदु। रक्षा बौड़ाई ‘हिलांस’: पहाड़ का बदलदा स्वरूप का कारण कविता का स्वरूप बि बदलण चंदन अर पलायन का संदर्भ मा कविता नई दृष्टि कि बात करि अर पहाड़ का वर्तमान दुःख संघर्ष पीड़ा पर रचनात्मकता कि बात करि।
गीता गैरोलन पहाड़ कि मूलभूत समस्याओं जनकि बांदर आतंक, संस्कार हौर समसामयिक विषयों पर बात करि।
डॉ. हर्षमणी भट्टन पुराणि कविता अर नई कविता तैं लीक तैका सौंदर्य शास्त्र पर तुलनात्मक अध्ययन कि बात करि अर वर्तमान मा कविता मा येकी कमी पर चिंता जतायी।
संस्था का संस्थापक अध्यक्ष अरविंद ‘प्रकृति प्रेमिन अपणि बात मा बोलि कि ‘ ‘साहित्य समाज कु दर्पण च” पण, ये दर्पण मा समाज पूरु नि दिखेंदू किलै कि यु दर्पण वर्तमान मा अवतल च उत्तल नी
तैमा क्षेत्र कु विस्तार नी ये हम तै उत्तल बणोणे जरूरत च जैमा समाजौ एक विस्तृत क्षेत्र दिखे सकु अर बोलि कि कवि कि कोशिश य हुयीं चैन्दी कि, सु उज्याळा कविता कथगा बि यथार्थ हो पण स्य सदानी मा छुर्पी चीजों तैं देखणा प्रयास मा रौ अर सकारात्मक जीवन कि बेहतरी का वास्ता हुई चैन्दी वर्तमान मा चलणा मुख्य विमर्श स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, आदिवासी विमर्श, पर्यावरण विमर्श, भूमंडलीकरण, हर्चदी सामूहिकता आदि विमशों पर बात
करि अर यूँ विमर्शों तैं गढ़वाळि कविता मा रचनात्मक दृष्टि से सामिल कन्न कि बात पर विशेष ध्यान देणा कि जरूरत बताई। कार्यक्रम का दूसरा चक्र मा कविता पाठ बि हे जैमा गीत गैरोलन- बांदर सारियों मा, रक्षा बौड़ाई ‘हिलांस ढुंगों का मुल्क, अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी’- गड्याळै बाणी ना लग, शिवदयाल ‘शैलज’-उठ ये मुल्क कि हवा पाणी बदली दे, हर्षमणी भट्ट – हरी मुंगरी द्वी, दीपक सती ‘प्रसाद’- उत्तराखंड मा जाया तुम,
डॉ. सत्यानंद बडोनी- मेरि माँ च मेरि माँ नामक एक से एक बढ़िक सुंदर रचना सुणायिन। कार्यक्रम कु संचालन दीपक सती प्रसादन करि। कार्यक्रमौ उद्देश्य गढ़वाळि कविता विमर्श से कविता साहित्य तैं हौर ज्यादा विकसित कन्न अर वैश्विक स्तरौ रचनात्मक विकास कन्न छौ।
