सासु जवैं कि, छ्वीं बथा !
सुसरास माँ जवैं कि आदर खातर खूबी हूँद,य बात हम सब जणदौ । जमनौ मां जून मैनकि छुट्टि बच्चों कु नन्यूगाँ, जवैं कि सौरास माँ बि बितयींदि छै। अबका दा रघुबर सिर्फ सात दिनकि छुट्टि ल्हेकि अयूं छौ। वैका अपणा गौं का कुड़ा पर क्वी नीछ । इनै सासुमाँ बि दानिमानि यखुलि छ । क्वी देश,क्वी परदेस, इनि हुयूँ सब गच्चपच्च । बड़ु लड़िक किशोर किबि टक छै लगीं कि अबका दा नन्यूॅगॉ जाण बल ।
रघुबर दूसरा गेट कि गडिसे उतरिकि, एक हथमाँ झोळा, हैका से नौ सालकु नौना का हथ थामिकि, मठुमठु द्विया माबत गौंका मुखैथर ऐगिन । समिणि सासुमाँ द्वार पर छै जग्वळणी।
आ बबा रघबर ! फून किलैनि काई ? चुलखन्द माथि रैंद धरयू । झणि कब, कख बार्ट बज जाँद घण्टि । मित ब्याळि बटि छौं, रस्ता द्यखणू । किशोर ! नाती, खूब छै बबा ? अच्छु च, पाँच सात दिन ननिकु ज्यू लग्यूं रालु,द्विया नहे ध्वे ल्या,खाणु खैकि तब लगौला छ्वीं बथा ।
ए नाति ! माँ निऐ न दगड़म् । ‘ननी अचकाल भोट बणाणकु काम चनू,माँ वैमा च लगीं’।छि भै, कबि जनगणना,कबि पशुगणना, मास्टर्याण पढ़ाँदि कबरि छिन,चुनौ कु ठेका भि ऊँकै मुण्डमथि छ । सुणौ रघबर ! देश फुण्डक हाल समाचार क्य छीं ? टीवी द्यखदरा छा ब्वा बल द्वी चार साल बाद दिल्लि,देरादूण रैणजुगा राला कि ना । हॉ जि, बड़ा बड़ा बजार,भीड़, गाड़ि, खुटु धनकि जगा नी अब, अगनै क्य होलु भगवान जण्यां । तखफुण्ड देखिकि त इन लगदु, अपणु मुलुक जनुबि च खूब च । जि ! घर गौंकि खुद त् लगदि च । छ्वटमाँ गोर बखरा, स्यारा -पुंगड़ा, गाड -गदना, घास लखड़ा सब द्यख्यां छिन। ब्यो बरति, थौळ, कौथिग, नचै-मण्डाण अब सुपिनु जन बिंगोंदु । जवैं जि सित् ठीक तुम ब्वना, पर जब यख मनखि निरयाँ, खेति -पति नि हुणी, गोर नि दिखींदा उबरौं,गों मॉ लोग नी रयाँ । परसि बल चकबन्दि वळा सरकरि आदिम छा अयां, पदान जिकि तिबरि माँ बैठिन, पदानजि भाबर रैंदिन ।बबा ऊंका दगड़ा मां क्वी बच्याण, बथाण वळु नीं छौ गाँमाँ । को कैकु पुंगुडु,फाँगु छ कैथे पता नी । कैकि हूण चकबन्दि ? कख कख छीं चक । जब क्वी खडु हुंदरु नी च त्, कैकि कन , कै खुणि कन, बोला त् । अरे, साल मां एक द्धि दा ऐ जांदा,बाप ददौं क बणायॉ बाटा गाटा देख जाँदा, जौं झुगरट्यों, मुंगरट्यों ऊंकि खैर खई, ऊँका दर्शन मात्र से पुण्य लगदु बेटा ।
पच्चीस साल ह्वेगिन राज बण्या रे रघबर ! कुछ हुणू त छैंच,पर कैखुणि ? यो सवाल बड़ु च, जैकु जबाब दीण प्वाड़लु लठ्याळा। सरकरि योजना भि खूब छिन,पर जख हूण चैन्द, तख हुणू च कि न ।
जी! जो बात आप ब्वना छौ, उन्द कखि नि सुणींदि । गौंका माटमाँ आप ल्वखूँकि तपस्या च करीं, देशमां रैकि मी इनु लगदु, एक टैम जरूर आलु,जब सब्य लोग यख आला, अरपुरणौंक घरद्वार जरूर खुज्याला ।
अयां बबा इनु वखत् जरूर अयां, अरे हम त् देवभूमि का लोग छौं, हमुन दुनिया तै भावभक्ति, आचरण कु पाठ पढ़ै । हमरि बोलिभाषा, हमरि स्वभाव कि सरलता हमरा गुण छन । पर्या चीज पर हम हथ भिनि लगांदा ।
रघबर, भौत खुशि च कि नाति देश माँ रैकि भि वो अपणि बोलि नि बिसर् । जी ठीक छौ ब्वना, हम सब परिवार, इष्टमित्र अपणि बोलि भाषा माँ व्यवहार करदों। बच्चों तें अपणु गौं, पट्टी, विकासरवण्ड, सब कुछ याद छ, आणांभि रंदौं। भोळ सुबेर गाड़ि भि पकड़ण । व्याळि परसि द्वी दिन गौंमां कुछ पुरणोंक ध्वार मि बैठिक ऐग्यों । द्वी नौनि त हमरै कुटुम कि छन।
जवैं ! सुबेर जाँदि बखत माद्यो माँ भगवान जिक अगनै हथ जौड़िक जै बबा । हमरु पुरणु शिवालय च वो । पूरणो बटि हमरि परम्परा च, भैर बटि आँद जाँद मन्दिर माँ खडु ह्वेकि प्रणाम जरूर कन । जि सासु माँ, ब्बलदिन बल जैका परिवार माँ बड़ु क्वी अड़ान्दरु च,वो भाग्यवान च । अगनै नौरात्रों मां भित आण, रामलीलों क बगत पर, तब कुछ और भि सुनणकु, सिखणकु मीललु।
किशोर ! ननि तैं सेवा लगा । जवैं पौंचदें फोन कैरि ह्वा, अबकि दा सुलोचना तैंबि दगड़म ल्याण, ब्वे थै देख जालि, अब हमुन दुनिया मां जो द्यरवण छौ देखयालि । चिरंजीव लाटा, अंक्वे जयाँ, से छ्वटकु ध्यान रैखि ।
