सुरेन्द्र दत्त सेमल्टी ‘देवभूमि गढ़वाल मां प्राचीनकाल से ही मैं बोली कु उपयोग यख का जनमानस द्वारा...
Month: August 2026
देलिम डंडा कुलड़ी थमलू गिंडसू अछेणु धरयूं कबरि ना कबरि त आलू बाघ चिमनु बल्यूँ सुरक किवाड़...
(भगतराम सेमवाल) तब गाय बाग, बंगार बणै, कप्तान साब से ह्वेगे लणैः । बाग लैगाया पोरु कई...
द्याखदी उ कन ध्वका दे गेन छवीं लगैन बड़ी बड़ी अर मी यखुलि छोड़ गेन विश्वास देकी...
पुस्तक समीक्षा….. (रमेश हितैषी) यो एक गढ़वाळि नाटक छ। जै मा कुल 25 किरदार छन। किताबो...
सरगा गिड़कतलि सूंणिकै है जांद वींफर भिभराट करण बै जांद खिबणाट बांधि दींद मुंड फर मुंड्यसु पखड़...
(भगवती जुयाल गढदेशी) मन दयालू मयालू कृपालू मिजाज कू दिलै गेड्डु खोलणू भौंण सुणाण कू ‘लिखदू जथा...
बल भैजी….. (दिनेश ध्यानी) सन् 1996 अप्रैल का मैना मिल टीरि अपणा दगड्या ब्यौ म अंजनीसैंण जाणु...
व्यंग मात्र (संदीप गढ़वाली) गौं गयूं रौ आज ब्याळि त खूब रौनक छै। सड़क्यूं फुण्ड घुमण वळा...
